जब उम्मीद भी भीगने लगे… तब एक छोटा सा सहारा सब बदल देता है
दूर गाँव से खबर आई —
नानी बहुत बीमार हैं।
घर में जैसे सन्नाटा छा गया।
माँ की आँखों में चिंता साफ दिख रही थी।
वो तुरंत जाना चाहती थीं… बच्चों के साथ।
लेकिन एक बड़ी समस्या सामने खड़ी थी —
टिकट नहीं मिल रहा था।
बेचैनी, आँसू और बेबस इंतज़ार
माँ बार-बार फोन लगा रही थीं,
हर बार वही जवाब — “कोई सीट उपलब्ध नहीं है।”
आँखों से आँसू रुक नहीं रहे थे।
बच्चे समझ नहीं पा रहे थे,
बस इतना जानते थे — माँ बहुत परेशान है।
घर का माहौल भारी हो चुका था।
और फिर… आसमान भी रोने लगा
अचानक बाहर तेज़ बारिश शुरू हो गई।
काले, घने बादल छा गए —
जैसे आसमान भी उसी चिंता में डूब गया हो।
बिजली की चमक, तेज़ हवा…
सब कुछ ऐसा लग रहा था मानो
कुछ बहुत गलत होने वाला है।
उसी पल… एक छोटी सी भूख
इतनी हलचल के बीच
छोटे भाई ने धीरे से कहा —
“दीदी, मुझे भूख लगी है…”
बड़ी बहन कुछ पल के लिए रुकी,
फिर उसने बैग से निकाला —
Poshan Potli Laddoos
उसने प्यार से एक लड्डू छोटे भाई को दिया।
वो मासूम मुस्कान…
जैसे अंधेरे में एक छोटा सा दीपक जल उठा हो।
और फिर… जैसे सब बदल गया
जैसे ही उस बच्चे ने पहला कौर लिया,
मानो कहानी ने मोड़ ले लिया—
बारिश धीरे-धीरे थमने लगी।
काले बादल छंटने लगे।
हवा में एक अजीब सी शांति घुल गई।
उसी वक्त फोन की घंटी बजी—
Tatkal में टिकट कन्फर्म हो गया था।
और अगले ही पल —
नाना का फोन आया… “नानी अब ठीक हैं।”
क्या ये सिर्फ एक इत्तेफाक था?
या फिर ये उस छोटे से पल का असर था,
जब किसी ने चिंता के बीच भी
पोषण, प्यार और विश्वास को चुना?
Poshan Potli Laddoos — सिर्फ खाना नहीं, एक भरोसा
ये लड्डू सिर्फ भूख मिटाने के लिए नहीं हैं।
ये उन पलों के लिए हैं जब—
घर में चिंता हो
समय साथ ना दे
और मन टूटने लगे
तब ये याद दिलाते हैं —
कि हर अंधेरे के बाद उजाला जरूर आता है।
अंत में…
जिंदगी में कुछ पल ऐसे आते हैं,
जब सब कुछ हमारे हाथ में नहीं होता।
लेकिन अगर उस समय
हम एक छोटा सा कदम उठाएं—
किसी का ख्याल रखें,
किसी की भूख मिटाएं…
तो शायद किस्मत भी मुस्कुरा देती है।
Poshan Potli Laddoos —
जहाँ हर एक लड्डू में छुपा है
एक छोटा सा चमत्कार, एक बड़ा सा भरोसा।